Ved, puran & Upanishad

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11 Upnishad Sangrah [Hindi]

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11 Upnishad Sangrah..

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Atharvved (Volume 1) [Hindi]

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अर्थववेद (भाग - १ ) अर्थववेद को वैदिक साहित्य में 'ब्रह्मवेद ', भैषज्यवेद ' और 'अथर्वगिरस ' नाम से भी पुकारा जाता है l अधर्वा और अंगिरस नामक ऋषि इस वेद की ऋचाऔ के द्रष्टा है l अथर्वा ऋषि ने जिन ऋचाओं का साक्षात्कार किया, वे अध्यात्मपरक, सुखकारक, आत्मिक उत्थान करने वाली तथा जीवन को मंगल से परिपूर्ण करने वाली है l ये ऋचाए सृजनात्मक है l अंगिरस ऋषि द्..

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Atharvved (Volume 2) [Hindi]

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अर्थववेद (भाग-२) अर्थववेद को वैदिक साहित्य में 'ब्रह्मवेद ', भैषज्यवेद ' और 'अथर्वगिरस ' नाम से भी पुकारा जाता है l अधर्वा और अंगिरस नामक ऋषि इस वेद की ऋचाऔ के द्रष्टा है l अथर्वा ऋषि ने जिन ऋचाओं का साक्षात्कार किया, वे अध्यात्मपरक, सुखकारक, आत्मिक उत्थान करने वाली तथा जीवन को मंगल से परिपूर्ण करने वाली है l ये ऋचाए सृजनात्मक है l अंगिरस ऋषि द्वार..

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Chaaro Ved Vishva ka Sarvoch Gyan [Hindi]

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Chaaro Ved Vishva Ka Sarvoch Gyan..

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Kaljugi Upnishad [Hindi]

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Kaljugi Upnishad..

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Nav Grah Purana Tales of the Nine Planets [English]

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Navagraha Purana chronicles in fascinating detail the birth, life and glory of the Nine Planets, the powerful astral deities who are the ultimate arbiters of man's destiny. This compelling narrative paints a delightfully intimate portrait of the Navagrahas. Surya subdues his raging heat to please his beloved Samjna. Chandra lusts after his guru's w..

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Nav Grah Purana [Hindi]

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नवग्रह पुराण नवग्रह पुराण इतिहास एक मनोमुग्धकारी वर्णन है जिसमे नवग्रहों के जन्म, जीवन, तथा महिमा का विस्तार से, रोचक आख्यान दिया गया है l ये वे सशक्त देवता गण है जो नक्षत्रीय देव है एवं जो मानव नियति के चरम भाग्य नियन्ता है l  यह सम्मोहक आख्यान नवग्रहों की आनंददायी, आत्मीय तथा रोचक एवं निजी कथाएँ प्रस्तुत करता है, यथा, सूर्य अपनी प्रचंड उष्णता, ते..

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Rigved (Volume 1) [Hindi]

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ऋग्वेद (भाग- १) 'ऋक' पद ऋच धातु से बना है l इसका अर्थ है - स्तुति करना l ऋग्वेद में स्तुति की प्रधानता है l अग्नि, इन्द्र, सूर्य, वायु, वरुण आदि देवताओं और ज्ञान की स्तुति ही इस सर्वाधिक प्राचीन वेद का लक्ष्य है l ऋग्वेद में 'सोमरस' के गुणों का व्यापक रूप से वर्णन किया गया है l यह सोम देवताओं को पुष्ट करता है, ताकि वे आसुरी शक्तियों को विनष्ट करने ..

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Rigved (Volume 2) [Hindi]

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ऋग्वेद (भाग- 2) 'ऋक' पद ऋच धातु से बना है l इसका अर्थ है - स्तुति करना l ऋग्वेद में स्तुति की प्रधानता है l अग्नि, इन्द्र, सूर्य, वायु, वरुण आदि देवताओं और ज्ञान की स्तुति ही इस सर्वाधिक प्राचीन वेद का लक्ष्य है l ऋग्वेद में 'सोमरस' के गुणों का व्यापक रूप से वर्णन किया गया है l यह सोम देवताओं को पुष्ट करता है, ताकि वे आसुरी शक्तियों को विनष्ट करने ..

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Rigved (Volume 3) [Hindi]

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ऋग्वेद (भाग- 3) 'ऋक' पद ऋच धातु से बना है l इसका अर्थ है - स्तुति करना l ऋग्वेद में स्तुति की प्रधानता है l अग्नि, इन्द्र, सूर्य, वायु, वरुण आदि देवताओं और ज्ञान की स्तुति ही इस सर्वाधिक प्राचीन वेद का लक्ष्य है l ऋग्वेद में 'सोमरस' के गुणों का व्यापक रूप से वर्णन किया गया है l यह सोम देवताओं को पुष्ट करता है, ताकि वे आसुरी शक्तियों को विनष्ट करने ..

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Rigved (Volume 4) [Hindi]

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ऋग्वेद (भाग- 4) 'ऋक' पद ऋच धातु से बना है l इसका अर्थ है - स्तुति करना l ऋग्वेद में स्तुति की प्रधानता है l अग्नि, इन्द्र, सूर्य, वायु, वरुण आदि देवताओं और ज्ञान की स्तुति ही इस सर्वाधिक प्राचीन वेद का लक्ष्य है l ऋग्वेद में 'सोमरस' के गुणों का व्यापक रूप से वर्णन किया गया है l यह सोम देवताओं को पुष्ट करता है, ताकि वे आसुरी शक्तियों को विनष्ट करने ..

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Rigved, Yajurved, Samved, Atharvaved (DPB) [Hindi]

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(Dpb) Rigved, Yajurved, Samved, Atharvaved..

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Sampoorna Ved Combo Pack Rigved, Yajurved, Samved, Atharvaved (All 4 Vedas) [Hindi]

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Sampoorna Ved Combo Pack (Hindi) Rigved, Yajurved, Samved, Atharvaved (All 4 Vedas) In this Set: Yajurved Samved Atharvved Vol-1 Atharvved Vol-2 Rigved Vol-1 Rigved Vol-2 Rigved Vol-3 Rigved Vol-4..

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Samved [Hindi]

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सामवेद उपासना का वर्णन है इस वेद में l  'साम' में 'सा' विधा को कहा गया है और 'अम' नाम है कर्म का 'सा' संकेत करता है सर्वशक्तिमान परमात्मा की ओर, जबकि 'अम ' का सकेतार्थ 'जीव' है l साम मंत्रो में गेय पक्ष की प्रधानता है, इसलिए इसके गान से श्रद्धा समर्पण की धारा उपासक के ह्रदय में सहज रूप से प्रवाहित हो जाती है - संगीत की स्वर लहरियो से कैसे रोम- रोम ..

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Shribhavishya Mahapuranam (3 Volume set) [Hindi]

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भविष्यपुराण से सम्बन्धित अपना मत लिखने के पूर्व यह कहना आवश्यक है कि विद्वानों का कथन है कि 'इतिहासपुराणाभ्यां वेदं समुपब्रम्हयेत ”कि इतिहास तथा पुराण वेद के उपबृंहित रूप हैं। यहाँ इतिहास तथा पुराण इन दो शब्दों का प्रयोग ध्यान देने योग्य तथ्य है। दोनों एक ही अर्थ के द्योतक नहीं हैं। इतिहास अलग और पुराण उससे अलग है। बृहदारण्यकउपनिषद्‌ के शांकरभाष्य ..

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